हंमारी भी एक थी कहानी,हमारी थी एक हसती पुरानी,
कंधे पर था दोस्तों का साथ ,सारा जमाना जीत लेते एसा था यारों का साथ ,
साथ बैठकर करते थे मस्ती ,जब समोसा था ४ का और चाय थी सस्ती ,
दोस्तों के लिया बचपन कुर्बान , आज साले बन बेठे है धड़कन और जान ,
छोटी से छोटी बातों को दिल से लगाया ,फिर भी कमीनों ने जाते जाते खूब हंसाया .....
पढ़ाई का तो सिर्फ बहाना था , स्कूल में तो सिर्फ दोस्तों से मिलने जाना था,
मेरे मरने के बाद तुझे एक वादा निभाना है मेरे दोस्त, मेरी अर्थी पर कहना," यार उठ कल मूवी देखने टाइम पर जाना है......"
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